महादेवी वर्मा का जीवन परिचय mahadevi verma ka jeevan parichay


mahadevi verma ka jeevan parichay महादेवी वर्मा का जीवन परिचय

Hello दोस्तो स्वागत है आपका gyankibook.com पर आज के इस लेख मे हमने mahadevi verma ka jivan parichay के बारे मे बात किया है। महादेवी वर्मा जी का जीवन परिचय board exam के कक्षा 10 मे जरुर आता है जो अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये हमारे लिये यह बहुत important होता है।

तो इसलिए आज हमने mahadevi verma ka jivan parichay लिखा है इस पोस्ट मे जिसे आप पड़ कर अपने परीक्षा मे लिख सकते है और अच्छे अंक प्राप्त कर सकते है तो चलिए अब हम देखते है विस्तार मे mahadevi verma jeevan parichay


जीवन - परिचय

महादेवी वर्मा का जन्म फर्रुखाबाद में होली के दिन सन् 1907 ( सं . 1964 ) में हुआ था । आपके पिताजी गोविन्द सहाय वर्मा इन्दौर के एक कॉलेज में अध्यापक थे और पाता हेमरानी धर्मपरायण महिला थीं । 

आपकी प्रारम्भिक शिक्षा इन्दौर में हुई । B.A और M.A की परीक्षाएँ प्रयाग विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की । 9 वर्ष की अल्पायु में स्वरूप नारायण वर्मा के साथ इनका विवाह हुआ किन्तु इनका विवाहित जीवन सुखी नहीं रहा ! आपके ससुर स्त्री शिक्षा के विरोधी थे ।


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इस कारण विवाह होने से इनका अध्ययन क्रम टूट गया । माता की धार्मिक प्रवृत्ति होने के कारण घर में इन्हें रामायण और महाभारत की कथाएँ सुनने का पर्याप्त अवसर मिला । परिणामस्वरूप बचपन से ही इनके मन में साहित्य के प्रति आकर्षण उत्पन्न हो गया था और बचपन से ही काव्य रचना करने लगी थीं । 


तत्पश्चात् प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्य नियुक्त हुईं और बहुत समय तक इस पद पर कार्य करती रहीं ।


कुछ वर्षों तक आप उत्तर पदेश विधानसभा की मनोनीत सदस्य भी रह चुकी हैं । आपकी साहित्यिक रचनाओं से प्रभावित होकर भारत सरकार ने आपको ‘ पद्म भूषण अलंकार से अलंकृत किया । 


आपको ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ है । जीवन के अन्तिम समय तक साहित्य - साधना में लीन रहते हुए 11 सितम्बर , 1987 ( सं . 2044 ) को आपका देहावसान हो गया


जन्म               =      सन् 1907 ई . ( सम्वत् 1964 वि . ) । 

जन्म स्थान      =   फर्रुखाबाद । 

पिता               =        गोविन्द सहाय वर्मा ।

मृत्यु               =      सन् 1987 ई . ( सम्वत् 2044 वि . ) ।

शिक्षा              =        एम . ए . ( संस्कृत ) ।

भाषा              =     साहित्यिक खड़ी बोली ।

शैली              =        छायावादी , मुक्तक शैली ।

रचनाएँ           =     नीहार , रश्मि , नीरजा , सान्ध्य गीत , दीपशिखा , सप्तपर्णा , हिमालय ।

 

आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी का जीवन परिचय


साहित्यिक परिचय

पहादेवी वर्मा छायावाद और रहस्यवाद की प्रमुख कवयित्री हैं । छायावाद के चार महान कवियों के वृहद् चतुष्ट्य ' में आपकी गणना की जाती है । महादेवी वर्मा का काव्य पीड़ा का काव्य है ।


इसलिए उन्हें आधुनिक युग की ' मीरा ' कहा जाता है । साहित्य और संगीत का अपूर्व संयोग करके ' गीत ' विधा को विकास की चरम सीमा पर पहुँचा देने का श्रेय महादेवी वर्मा को ही है ।


महादेवी वर्मा मूलतः कवि हैं किन्तु उनका गद्य भी कम महत्त्वपूर्ण नहीं है । उनके गद्य में भी काव्य जैसा आनन्द आता है । इस प्रकार हिन्दी साहित्य जगत में महादेवी वर्मा का उच्चतम स्थान है ।


रचनाएँ

श्रीमती महादेवी वर्मा मूलत : कवयित्री हैं । साथ में उच्चकोटि की गद्य लेखिका भी हैं । नीहार ' , ' रश्मी ' , ' नीरजा ' , ' यामा ' , ' सान्ध्य गीत ' , ' दीपशिखा ' आपकी प्रमुख काव्य रचनाएँ हैं । ' यामा ' और ' दीपशिखा ' पर आपको पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं ।

 ' अतीत के चलचित्र ' , ' शृंखला की कड़ियाँ ' , ' स्मृति की रेखाएँ ' आपके गद्यात्मक संस्मरण हैं । इन संस्मरणों में काव्य का सा आनन्द ही आता है ।


Conclusion

आज के लेख मे हमने mahadevi verma ka jivan parichay देखा विस्तार मे जो आपको बहुत मदद करेगा आपको हिन्दी के विषय मे अच्छे अंक प्राप्त करने मे और आपको इसे जरुर याद करके जाना चाहिए । उमीद है आपको यह लेख अच्छा लगा होगा अपना सुझाओ हमारे साथ share जरुर करे और इस पोस्ट तो अपने दोस्तो के साथ share भी जरुर करे । धन्यवाद 

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