डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी का जीवन परिचय dr rajendra prasad ka jeevan parichay


dr rajendra prasad ka jeevan parichay - डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी का जीवन परिचय ।

Rajendra prasad ka jeevan parichay. Hello दोस्तो स्वागत है आपका gyankibook के एक और नए लेख मे आज के इस पोस्ट मे हम डॉ . राजेन्द्र प्रसाद जी का जीवन परिचय देखेंगे । 

डॉ . राजेन्द्र प्रसाद स्वतन्त्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति भी रह चुके है। और इनका जीवन परिचय बोर्ड परीक्षा के कक्षा 10वी के हिन्दी विषय मे जरुर से पुछा जाता है । इसलिए डॉ . राजेन्द्र प्रसाद जी का जीवन परिचय हमरे लिये काफी महत्वपूर्ण होता है । आपको इनकी जीवनी को पड़ कर हिन्दी का परीक्षा देने जाना चाहिए ताकी आप अपने हिन्दी के विषय मे अच्छे अंक प्राप्त कर सके ।

और इसलिए आज के इस पोस्ट मे हमने इनका जीवन परिचय लिखा है जो की आप बडे ही आराम से याद कर सकते है तो चलिए देखते है dr rajendra prasad ka jeevan parichay विस्तार मे ।

जन्म   ----  सन् 1884 ई .। 
जन्म स्थान    ----   छपरा जिले के जीरादेई नामक ग्राम में।
शिक्षा  ----  कोलकाता विश्वविद्यालय से एम . ए . तथा एल .एम . एम .
मृत्यु    ----   सन् 1963 
भाषा    ----   विषयानुकूल सरल , शुद्ध प्रवाहमयी।
शैली    ----   प्रकृति के अनुकूल सरल और सुबोध।
रचनाएँ    ----   गाँधीजी की देन , भारतीय शिक्षा , साहित्य और संस्कृति , आत्मकथा , आदि।

dr rajendra prasad ka jeevan parichay

स्वतन्त्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति देश - रत्न डॉ . राजेन्द्र प्रसाद का जन्म बिहार प्रान्त के छपरा जिले के जीरादेई नामक ग्राम में सन् 1884 ई . में हुआ था । आपने कोलकाता विश्वविद्यालय से एम . ए . तथा एल . एम . एम . की परीक्षा उत्तीर्ण की थी । 

आपने मुजफ्फरपुर के एक कॉलेज में कुछ समय तक अध्यापन कार्य किया था । इसके बाद सन् 1920 तक क्रमश : कोलकाता और पटना हाईकोर्ट में वकालत की । गाँधीजी के सम्पर्क से आप पर गाँधीजी के जीवन के सिद्धान्तों का विशेष प्रभाव पड़ा। 

अत : आप 1920 में वकालत छोड़कर स्वतन्त्रता संग्राम में कूद पड़े आप अपनी देशभक्ति , देशनिष्ठा से भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के तीन बार सभापति चुने गये । आप सन् 1952 से 1962 तक भारत के राष्ट्रपति रहे । 1963 में यह देश - रत्न इस लोक को त्याग कर परलोक सिधार गया।


साहित्यिक परिचय

यद्यपि डॉ . राजेन्द्र प्रसाद एक बड़े राजनीतिज्ञ और सच्चे समाज सेवी थे किन्तु साहित्यकार के रूप में भी उनका कम महत्त्व नहीं है । 
राजनीति और देश - सेवा में व्यस्त रहते हुए भी हिन्दी के प्रचार और साहित्य सम्वर्द्धन में उनका योगदान विशेष महत्त्वपूर्ण है । अत : राजनीतिक क्षेत्र की भाँति हिन्दी साहित्य में भी इनका प्रमुख स्थान है। आप एक सच्चे देशभक्त और सहृदय साहित्यकार थे । रचनाएँ आपकी प्रसिद्ध कृतियाँ निम्नलिखित हैं गाँधीजी की देन , भारतीय शिक्षा और संस्कृति , आत्मकथा आदि ।

भाषा — आपने विषयानुकूल सरल , शुद्ध प्रवाहमयी भाषा का प्रयोग किया है । भावों को स्पष्ट करने के लिए आपने संस्कृत के तत्सम शब्दों के साथ अंग्रेजी , उर्दू और फारसी के प्रचलित शब्दों का भी प्रयोग किया है ।

शैली — आपकी शैली प्रकृति के अनुकूल सरल और सुबोध है । वह कृत्रिमता और आडम्बर से रहित है । आपने छोटे और बड़े दोनों प्रकार के वाक्यों का भी प्रयोग किया है जो अत्यन्त सार्थक हैं । 

कहीं - कहीं गम्भीर भावों को प्रकट करने के लिए अलंकारों का प्रयोग किया है । आपने विचारात्मक शैली में क्रमबद्ध विचारों को छोटे - छोटे वाक्यों में उदाहरण द्वारा प्रस्तुत किया है । गम्भीर विषयों को साहित्यिक शैली में लिखा है । हिन्दी - 

साहित्य में स्थान — यद्यपि डॉ . राजेन्द्र प्रसाद एक बड़े राजनीतिज्ञ और सच्चे समाजसेवी थे किन्तु साहित्यकार के रूप में भी उनका कम महत्त्व नहीं है । राजनीति और देश सेवा में व्यस्त रहते हुए भी हिन्दी के प्रचार और साहित्य सम्वर्द्धन में उनका योगदान विशेष महत्त्वपूर्ण है । अतः राजनीतिक क्षेत्र की भाँति हिन्दी साहित्य में भी इनका प्रमुख स्थान है।


Conclusion 

आज के इस पोस्ट मे हमने dr rajendra prasad ka jeevan parichay देखा जोकि हमारे बोर्ड के कक्षा 10वी के लिये बहुत महत्वपूर्ण होता है । यदि आपको 10वी के हिन्दी विषय मे अच्छे अंक प्राप्त करने है तो आपको डॉ . राजेन्द्र प्रसाद जी का जीवन परिचय जरुर से याद करना चाहिए।

क्योकी इनका जीवन परिचय बोर्ड के परीक्षा मे आने के बहुत ज्यादा chances होते है । और इसलिए हमने इस लेख मे rajendra prasad ka jeevan parichay विस्तार से बताया है । हमे उमीद है आपको यह लेख पसंद आया होगा । अपना सुझाओ हमारे साथ कमेंट करके जरुर से शेयर करे । और इस लेख को अपने 10वी के मित्रो के साथ भी शेयर करे । धन्यवाद


आचार्य रामचन्द्र शुक्लआचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदीजयशंकर प्रसादपदुमलाल पुन्नालाल बख्शीडॉ. राजेन्द्र प्रसादजय प्रकाश भारतीडॉ. भगवतशरण उपाध्यायश्री रामधारी सिंह  दिनकरसूरदास 》तुलसीदासरसखानबिहारीलालसुमित्रानंदन पन्तमहादेवी वर्मापं. रामनरेश त्रिपाठी 》माखन लाल चतुर्वेदी 》सुभद्रा कुमारी चौहान 》त्रिलोचन 》केदारनाथ सिंहअशोक वाजपेयी



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