रहीम दास का जीवन परिचय | Rahim Das Ka Jivan Parichay

rahim das ka jivan parichay

इस आर्टिकल में हम रहीम दास जी के जीवन परिचय को बिल्कुल विस्तारपूर्वक से समझेंगे। आपको बता दे की रहीम दास जी एक कवि थे जो मुगल सम्राट अकबर के शासन के दौरान भारत में रहते थे। कक्षा 10 और 12 में पढ़ रहे छात्रों के लिए इनकी जीवनी को जानना काफी महत्वपुर्ण है। क्योकी बोर्ड की परीक्षा में हिन्दी के विषय में रहीम दास का जीवन परिचय आने की सम्भावना सबसे अधिक होती है। ऐसे में अगर आप बोर्ड के परिक्षा की तैयारी कर रहे है तो, इस जीवनी को आप अच्छे से जरुर पढ़े और समझें, जिससे की आपको परिक्षा में रहीम दास की जीवनी को लिखने में असानी हो। 

इसके अलावा यदि आप उन छात्रों में से है, जो इस समय किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है तो, आपके लिए भी रहीम जी की जीवनी को पढ़ना काफी महत्वपुर्ण है। क्योकी इस जीवनी में हमने रहीम दास जी के जीवन से जुड़े उन सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों को सामिल किया गया है जो किसी भी प्रतियोगी परीक्षाओं में पुछे जा सकते है। जैसे की - रहीम दास का पूरा नाम क्या है, रहीम का जन्म कब और कहाँ हुआ था, रहीम जी की मृत्यु कब हुई थी, रहीम दास की माता का नाम क्या है, रहीम के पिता का नाम क्या है, रहीम किस काल के कवि थे, रहीम का साहित्यिक परिचय और रहीम की प्रमुख रचनाएँ आदि। 

इन सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर आपको इस लेख में बिल्कुल विस्तार से देखने को मिल जायेंगे। तो अगर आप Rahim Das Ka Jeevan Parichay एकदम अच्छे से समझना चाहते है तो, इस लेख को पुरा अन्त तक जरुर पढ़े। तो चलिये अब हम रहीम दास जी की सम्पुर्ण जीवनी को बिल्कुल विस्तारपूर्वक से समझें।

रहीम दास की जीवनी (Rahim Das Biography In Hindi)

नाम रहीम दास
पुरा नाम अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना
जन्म तिथि 17 दिसंबर 1556
जन्म स्थान लाहौर
मृत्यु तिथि 1 अक्टूबर 1627
मृत्यु स्थान आगरा, मुगल साम्राज्य
आयु (मृत्यु के समय) 70 वर्ष
धर्म इस्लाम
भाषा ब्रज
पिता का नाम बैरम खान
माता का नाम सुल्ताना बेगम (जमाल खान की बेटी)
जीवनसंगी का नाम मह बानू बेगम
संतान के नाम शाहनवाज़, दाराब, रहमानदाद
रचनाएँ रहिमन विनोद, रहीम 'कवितावली, रहिमन चंद्रिका, रहीम रत्नावली, रहीम विलास, रहिमन शतक

रहीम दास का जीवन परिचय (Rahim Das Ka Jivan Parichay)

रहीम का पूरा नाम अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना था। इनका जन्म सन् 1556 ई० में लाहौर (वर्तमान में पाकिस्तान) में हुआ था। इनके पिता बैरम खाँ मुगल सम्राट अकबर के संरक्षक थे किन्हीं कारणोंवश अकबर बैरम खाँ से रुष्ट हो गया था और उसने बैरम खाँ पर विद्रोह का आरोप लगाकर हज करने के लिए मक्का भेज दिया। मार्ग में उसके शत्रु मुबारक खाँ ने उसकी हत्या कर दी।

बैरम खाँ की हत्या के पश्चात् अकबर ने रहीम और उनकी माता को अपने पास बुला लिया और रहीम की शिक्षा की समुचित व्यवस्था की। प्रतिभासम्पत्र रहीम ने हिन्दी, संस्कृत, अरबी, फारसी, तुर्की आदि भाषाओं का अच्छा ज्ञान प्राप्त कर लिया था। इनकी योग्यता को देखकर अकबर ने इन्हें अपने दरबार के नवरत्नों में स्थान दिया। 

ये अपने नाम के अनुरूप अत्यन्त दयालु प्रकृति के थे। मुसलमान होते भी ये श्रीकृष्ण के भक्त थे। अकबर की मृत्यु के पश्चात् जहाँगीर ने इन्हें चित्रकूट में नजरबन्द कर दिया था। केशवदास और गोस्वामी तुलसीदास से इनकी अच्छी मित्रता थी। इनका अन्तिम समय विपत्तियों से घिरा रहा और सन् 1627 ई० में मृत्यु हो गयी।

रहीम दास की साहित्यिक सेवाएँ (Rahim Das Ka Sahityik Parichay)

पिता बैरम खाँ अपने युग के एक अच्छे नीतिज्ञ एवं विद्वान् थे, अतः बाल्यकाल से ही रहीम को साहित्य के प्रति अनुराग उत्पन्न हो गया था। योग्य गुरुओं के सम्पर्क में रह कर इनमें अनेक काव्य-गुणों का विकास हुआ। इन्होंने कई ग्रन्थों का अनुवाद किया तथा ब्रज, अवधी एवं खड़ीबोली में कविताएँ भी लिखीं।

इनके 'नीति के दोहे' तो सर्वसाधारण की जिह्वा पर रहते हैं। दैनिक-जीवन की अनुभूतियों पर आधारित दृष्टान्तों के माध्यम से इनका कथन सीधे हृदय पर चोट करता है। इनकी रचना में नीति के अतिरिक्त भक्ति एवं श्रृंगार की भी सुन्दर व्यंजना दिखायी देती है। इन्होंने अनेक ग्रन्थों का अनुवाद भी किया।

रहीम दास की रचनाएँ (Rahim Das ki rachnaye)

रहीम की रचनाएँ इस प्रकार हैं - रहीम सतसई, शृंगार सतसई, मदनाष्टक, रास पंचाध्यायी, रहीम रत्नावली एवं बरवै नायिका-भेद-वर्णन। 'रहीम सतसई' नीति के दोहों का संकलन ग्रन्थ है। इसमें लगभग 300 दोहे प्राप्त हुए हैं। ‘मदनाष्टक' में श्रीकृष्ण और गोपियों की प्रेम सम्बन्धी लीलाओं का सरस चित्रण किया गया है। 'रास पंचाध्यायी' श्रीमद्भागवत पुराण के आधार पर लिखा गया ग्रन्थ है जो अप्राप्य है। 'बरव नायिका भेद' में नायिका भेद का वर्णन बरवै छन्द में किया गया है।

रहीम दास की भाषा शैली

रहीम जनसाधारण में अपने दोहों के लिए प्रसिद्ध हैं, पर इन्होंने कवित्त, सवैया, सोरठा तथा बरवै छन्दों में भी सफल काव्य-रचना की है। इन्होंने ब्रज भाषा में अपनी काव्य-रचना की। इनके ब्रज का रूप सरल, व्यावहारिक, स्पष्ट एवं प्रवाहपूर्ण है। ये कई भाषाओं के जानकार थे, इसलिए इनकी काव्य-भाषा में विभिन्न भाषाओं के शब्दों के प्रयोग भी देखने को मिलते हैं। अवधी में ब्रजभाषा के शब्द तो मिलते ही हैं, पर अवधी के ग्रामीण शब्दों का भी खुलकर प्रयोग इन्होंने किया है। इन्होंने मुक्तक शैली में काव्य-सृजन किया। इनकी यह शैली अत्यन्त सरस, सरल एवं बोधगम्य है।

रहीम दास का जीवन परिचय वीडियो के माध्यम से समझें


FAQ: रहीम दास के बारे में पुछे जाने वाले प्रश्न और उनके उत्तर


प्रश्न -- रहीम का पूरा नाम?

उत्तर -- रहीम दास का पूरा नाम अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना था।

प्रश्न -- रहीम का जन्म कब हुआ था?

उत्तर -- रहीम दास का जन्म 17 दिसंबर 1556 में हुआ था।

प्रश्न -- रहीम दास का जन्म कहाँ हुआ था?

उत्तर -- रहीम दास का जन्म लाहौर में हुआ था जोकि, वर्तमान समय में पाकिस्तान में है।

प्रश्न -- रहीम जी की मृत्यु कब हुई थी?

उत्तर -- रहीम दास जी की मृत्यु 1 अक्टूबर 1627 में हुई थी।

प्रश्न -- रहीम की माता का नाम?

उत्तर -- रहीम दास के माता जी का नाम सुल्ताना बेगम था।

प्रश्न -- रहीम के पिता का नाम लिखिए?

उत्तर -- रहीम दास के पिता जी का नाम बैरम खान था।

प्रश्न -- रहीम दास की पत्नी का क्या नाम था?

उत्तर -- रहीम दास की पत्नी जी का नाम मह बानू बेगम था जोकि, जमाल खान की बेटी थी।

प्रश्न -- रहीम किस काल के कवि थे?

उत्तर -- रहीम दास जी मध्यकाल के कवि थे।

निष्कर्ष

यहा पर इस लेख में हमने रहीम दास की सम्पुर्ण जीवनी को बिल्कुल विस्तार से समझा। हमने यहा पर रहीम जी के जीवन से जुड़े उन सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों को समझा जो कक्षा 10 और 12 के बोर्ड की परीक्षा में एवं किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में पुछे जाते है। तो, अगर आप बोर्ड के परीक्षा की या फिर किसी कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी कर रहे है तो, इस लेख को आप पुरा ध्यानपूर्वक से जरुर पढ़े। क्योकी इससे आपको परिक्षा में काफी मदद मिल सकती है।

इसी के साथ हम आशा करते है की आपको यह जीवनी जरुर से पसंद आया होगा और हमे उमीद है की, इस लेख की सहायता से आपको रहीम दास का जीवन परिचय एकदम अच्छे से समझ में आ गया होगा। अगर आपके मन में इस लेख से सम्बंधित कोई सवाल या सुझाव हो तो, आप हमे नीचे कमेंट कर सकते हैं। और साथ ही इस rahim das ki jeevani को आप अपने सहपाठी एवं मित्र के साथ शेयर भी जरुर करे।

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