त्रिलोचन का जीवन परिचय | Trilochan Ka Jivan Parichay

trilochan ka jivan parichay

इस आर्टिकल में हम त्रिलोचन जी के जीवन परिचय को विस्तार से देखेंगे। हम यहा पर इनके जीवन परिचय के साथ-साथ इनके काव्य रचनाएँ को भी विस्तार से देखेंगे। तो, अगर आप Trilochan Ka Jeevan Parichay विस्तार से पढ़ना चाहते है तो, इस आर्टिकल को पुरा अन्त तक पढ़ें।

त्रिलोचन का जीवन परिचय (Trilochan Ka Jivan Parichay)

जन्म  ---  20 अगस्त सन् 1917 ई.।
जन्म स्थान  ---  सुल्तानपुर, उ प्र. (चिरानी पट्टी)।
पिता  ---  जगरदेव सिंह।
मृत्यु  ---  7 दिसम्बर सन् 2007 ई.
भाषा  ---  खड़ी बोली।
रचनाएँ  ---  काव्य संग्रह -- धरती गुलाब और बुलबुल, दिगन्त, ताप के  ताए हुये दिन, शब्द उस जनपद का कवि हूँ अरधान, तुम्हें सौंपता हूँ, जीने की कला आदि।
सम्पादन  ---  प्रभाकर, वानर, हंस, आज, समाज आदि
कहानी संग्रह  ---  देश काल।

त्रिलोचन जी का जीवन परिचय

त्रिलोचन शास्त्री का वा विक नाम वसुदेव सिंह है। इनका जन्म सुल्तानपुर (उ. प्र.) जिले के चिरानी पट्टी में 20 अगस्त सन् 1917 ई. को हुआ था। शास्त्री परीक्षा उत्तीर्णोपरान्त इन्होंने एम. ए. (पूर्वार्द्ध) की परीक्षा उत्तीर्ण की। स्वाध्याय से त्रिलोचन ने उर्दू , फारसी, अरबी तथा अन्य अनेक भारतीय भाषाओं का ज्ञान प्राप्त किया। 'ताप के ताए हुए दिन' इनका काव्य संग्रह है, जिस पर साहित्य अकादमी पारितोषिक भी प्राप्त हो चुका है।

त्रिलोचन शास्त्री एक कवि होने के साथ साथ एक सफल सम्पादक के रूप में भी जाने जाते हैं। उन्होंने पत्रकारिता के साथ-साथ कोशसम्पादन भी भली-भाँति किया है। त्रिलोचन जी ने अनेक पत्रिकाओं से सम्बद्ध रहकर कार्य किया जिनमें वे 'हंस' तथा 'कहानी' पत्रिकाओं से विशेष रूप सम्बद्ध रहे। इनके अतिरिक्त वे 'आज' , 'जनवार्ता' , 'समाज' , 'प्रदीप' , और 'चित्रलेखा' , आदि पत्रिकाओं के सह-सम्पादक के रूप में सुचारू कार्य किया, वे सागर विश्वविद्यालय में मुक्तिबोध पीठ के अतिथि प्रोफेसर के रूप में कार्य कर चुके हैं। यह महान विभूति। दिसम्बर सन 2007 ई. को 90 वर्ष की आयु म परलोक सिधार गया।

त्रिलोचन की काव्य रचनाएँ

इनकी प्रमुख काव्य रचनाएँ इस प्रकार हैं --
'धरती' , 'दिगन्त' , 'शब्द' , 'ताप के ताए हुए दिन' , 'गुलाब और बुलबुल' , 'उस जनपद का कवि हूँ , 'अरधान' तथा 'तुम्हें सौंपता हूँ' , 'चेती' , 'जीने की कला' , 'फूल नाम है एक' , 'सबका अपना आकाश' , 'अगर चोर मर जाता' , 'आदगी की गंध' , 'एक लहर फैली अनन्त की' , आदि।

त्रिलोचन जननीवन से जुड़े हुए कवि हैं उनकी कविताओं में माटी की महक है। उन्होंने मानवीय अनुभूतियो। का सहज एवं सजीव चित्रण किया है, इनकी कविताओं में प्रगतिशीलता का गुण विद्यमान है। भाषा सरल है सुबोध है तथा जनमानस के अति निकट है। शिल्पगत सौंदर्य की दृष्टि से वे स्वयं अपनी तुलना में आप ही हैं। ताप के ताए हुए दिन (1980) के कविता संग्रह पर उन्हें सन् 1981 में साहित्य अकादमी पुुस्कार प्राप्त हुआ था।

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