केदारनाथ सिंह का जीवन परिचय | Kedarnath Singh Ka Jivan Parichay

kedarnath singh ka jivan parichay

इस आर्टिकल में हम केदारनाथ सिंह जी के जीवन परिचय को विस्तार से देखेंगे। हम यहा पर इनके जीवन परिचय के साथ-साथ इनके काव्य संग्रह को भी विस्तार से देखेंगे। तो, अगर आप kedarnath singh ka jivan parichay विस्तार से पढ़ना चाहते है तो, इस आर्टिकल को पुरा अन्त तक पढ़ें। 

केदारनाथ सिंह का जीवन परिचय (Kedarnath Singh Ka Jivan Parichay)

जन्म  ---  सन् 1934 ई.।
जन्म स्थान  ---  बलिया, उ. प्र. (चकिया ग्राम)।
भाषा  ---  खड़ी बोली।
रचनाएँ  ---  कविता संग्रह  -- अभी बिल्कुल अभी, जमीन पक रही है, यहाँ पर देखो, अकाल में सारस, टॉल्स्टॉय और साइकिल, तीसरा सप्तक, आदि।
निबन्ध और कहानियाँ  ---  मेरे समय के शब्द, कल्पना और छायावाद, हिन्दी कविता में बिम्ब विधान, कब्रिस्तान में पंचायत आदि।

श्री केदारनाथ सिंह जी का जीवन परिचय

श्री केदारनाथ सिंह का जन्म सन् 1934 में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के चकिया ग्राम में हुआ था। आपने 1956 ई. में बनारस विश्वविद्यालय से हिन्दी विषय में एम. ए. तथा 1964 ई. में पी-एच. डी. की उपाधि प्राप्त की। अनेक कॉलेजों में अध्यापन के बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष पद से अवकाश प्राप्त किया।

केदारनाथ सिंह को 'अकाल में सारस' कविता संग्रह के लिए 1989 ई. में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, कुमारन आशान पुरस्कार (केरल), दिनकर पुरस्कार, जीवन भारती सम्मान (उड़ीसा) तथा व्यास सम्मान से सुशोभित किया गया। आप समकालीन कविता के प्रमुख हस्ताक्षर हैं।

केदारनाथ सिंह के काव्य संग्रह

केदारनाथ सिंह के प्रमुख काव्य संग्रह हैं -- 'अकाल में सारस' , 'उत्तर कबीर और अन्य कविताएँ' , 'बाघ' , 'यहाँ से देखो'
इसके अतिरिक्त अन्य रचनाएँ हैं  -- 'अँधेरे पाख का चाँद' , 'एक नये दिन के साथ' , 'गर्मी में सूखते हुए कपड़े' , 'घड़ी' , 'खोल दूं यह आज का दिन' , 'जनहित का काम' , 'दाने दशा' , 'दुपहरिया' , 'नदी' , 'पाँचवी चिट्ठी' , 'पानी में घिरे हुए लोग' , 'प्रक्रिया' , 'फसल' , 'फागुन का गीत' , 'बनारस' , 'बढ़ई और चिड़िया' , 'बसन्त' , 'बुनाई का गीत' , 'मुक्ति' , 'मैच और मचान' , 'यह पृथ्वी रहेगी' , 'शहर में रात' , 'शाम चल दी है' , 'हक दो' , 'सुई और तागे के बीच में' , 'सार्च की कब्र पर' , 'सन् 47 को याद करते हुए' आदि।

आपकी कविताओं में ग्रामीण एवं नगरीय परिवेश का द्वन्द्व स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है। 'बाघ' आपकी प्रमुख कविता है जो मील का पत्थर मानी जाती है। दिल्ली की हिन्दी अकादमी का दो लाख का सर्वोच्च शलाका सम्मान आपके द्वारा सन् 2010 में ठुकराया गया। कविता के अतिरिक्त निबन्ध साहित्य, समीक्षा साहित्य पर भी आपने लेखनी चलाई है। श्री केदारनाथ सिंह बहुमुखी प्रतिभा के साहित्यकार हैं। अभी हिन्दी जगत को आपसे बड़ी-बड़ी अपेक्षाएँ हैं।

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