जयप्रकाश भारती का जीवन परिचय | Jai Prakash Bharti Ka Jivan Parichay


इस आर्टिकल में हम जयप्रकाश भारती जी के जीवन परिचय को विस्तार से देखेंगे। हम यहा पर इनके जीवन परिचय के साथ-साथ इनके रचनाएँ, साहित्यिक परिचय भाषा, शैली, और साहित्य में स्थान को भी विस्तार से देखेंगे। तो, अगर आप jai prakash bharti ka jeevan parichay विस्तार से पढ़ना चाहते है तो, इस आर्टिकल को पुरा अन्त तक पढ़ें।

जयप्रकाश भारती का जीवन परिचय (Jai Prakash Bharti Ka Jivan Parichay)

जन्म  ---  सन् 1936 ई.।
मृत्यु  ---  5 फरवरी , 2005 ई .।
जन्म स्थान  ---  मेरठ (उ. प्र.)।
शिक्षा  ---  बी. एस. सी।
भाषा  ---  ओजपूर्ण, भावानुकूल भाषा।
शैली  ---  वर्णनात्मक और चित्रात्मक शैली।
रचनाएँ  ---  हिमालय की पुकार, अनन्त आकाश, अथाह सागर, देश हमारा देश हमारा, चलो चाँद पर चलें आदि।
सम्पादन  ---  भारत की प्रतिनिधि कथाएँ, किरण माला।

जयप्रकाश भारती जी का जीवन परिचय

युवा पत्रकार, उदीयमान लेखक जयप्रकाश भारती का जन्म सन् 1936 में मेरठ (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। आपके पिता श्री रघुनाथ सहाय एडवोकेट मेरठ के प्रमुख समाजसेवी थे। मेरठ से बी. एस. सी. की परीक्षा उत्तीर्ण कर अपने छात्र जीवन में आपने अनेक समाजसेवी संस्थाओं में भाग लेना प्रारम्भ कर दिया मेरठ में साक्षरता प्रसार के कार्य में आपका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा।

आपने वर्षों तक नि: शुल्क प्रौढ़ रात्रि पाठशाला का संचालन किया। आपने 'सम्पादन कला विशारद' करके 'दैनिक प्रताप' (मेरठ) तथा 'नवभारत टाइम्स' (दिल्ली) में पत्रकारिता का व्यवहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया साक्षरता निकेतन (लखनऊ) में नवसाक्षर साहित्य के लेखन का आपने विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया।

आपने हिन्दी पत्रकारिता जगत मैं वैज्ञानिक साहित्य का निर्माण किया जो युवकों को प्रेरणास्पद है। आप अनेक वर्षों तक 'साप्ताहिक हिन्दुस्तान' के सह-सम्पादक रहे। आप काफी समय तक प्रसिद्ध बाल-पत्रिका के सम्पादक भी रहे। 5 फरवरी, 2005 ई. को इनका निधन हो गया।

जय प्रकाश भारती का साहित्यिक परिचय

जयप्रकाश भारती युवा पत्रकार, वैज्ञानिक साहित्य के प्रणेता, किशोर साहित्य सृष्टा और उदीयमान लेखक के रूप में हमारे समक्ष आते हैं। हिन्दी की साहित्यिक शैली में वैज्ञानिक निबन्ध प्रस्तुत करने में आपको विशेष सफलता और ख्याति मिली है। इस दृष्टि से हिन्दी साहित्य में आपका विशिष्ट स्थान है।

जय प्रकाश भारती जी की रचनाएँ

भारती जी की सुप्रसिद्ध रचनाएँ निम्नलिखित हैं 

यूनेस्को द्वारा पुरस्कृत रचनाएँ --- हिमालय की पुकार, अनन्त आकाश, अथाह सागर, हीरा का हार। 
भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत रचनाएँ --- देश हमारा देश हमारा, चलो चाँद पर चलें।
अन्य रचनाएँ --- सरदार भगतसिंह, हमारे गौरव के प्रतीक, उनका बचपन यूँ बीता, ऐसे थे हमारे बापू, लोकमान्य तिलक, बर्फ की गुड़िया, दुनिया रंग-बिरंगी।
सम्पादन --- भारत की प्रतिनिधि कथाएँ, किरण माला, नन्दन आदि।

जय प्रकाश भारती जी की भाषा

भारती जी की भाषा सरल, शुद्ध और परिमार्जित खड़ी बोली है। आपकी भाषा में संस्कृत के तत्सम् और तद्भव शब्दों के साथ अंग्रेजी और उर्दू के शब्दों का स्वाभाविक प्रयोग भी मिलता है। आवश्यकता के अनुसार विज्ञान की पारिभाषिक शब्दावली का प्रयोग भी आपकी रचनाओं में मिलता है, फिर भी वर्णन में कहीं भी जटिलता नहीं आने पायी है।

जय प्रकाश भारती की शैली

भारती जी की शैली रोचक और प्रभावपूर्ण है। आपके लेखों में वैज्ञानिक प्रसंगों का यथावश्यक विवरण भी मिलता है परन्तु उसमें नीरसता नहीं आने देते हैं, अपितु उसमें कवित्व का पुट देकर उन्हें सरस एवं रोचक बना देते हैं। इस प्रकार उन्होंने वैज्ञानिक विषयों को साहित्यिक बाना पहिनाने का एक मार्ग दिखलाया है। आपकी शैली कहीं वर्णनात्मक है, कहीं परिचयात्मक और कहीं चित्रात्मक। आपकी शैली में नाटकीय रोचकता के साथ सहज आकर्षण पाया जाता है।

जय प्रकाश भारती का साहित्य में स्थान

जयप्रकाश भारती युवा पत्रकार, वैज्ञानिक साहित्य के प्रणेता, किशोर साहित्य सृष्टा और उदीयमान लेखक के रूप में हमारे समक्ष आते हैं। हिन्दी की साहित्यिक शैली में वैज्ञानिक निबन्ध प्रस्तुत करने में आपको विशेष सफलता और ख्याति मिली है। इस दृष्टि से हिन्दी साहित्य में आपका विशिष्ट स्थान है।

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