गुणसूत्र किसे कहते हैं ? (Chromosomes in hindi)

गुणसूत्र की संरचना

गुणसूत्र किसे कहते हैं और इसकी खोज किसने की ?

गुणसूत्र की सर्वप्रथम खोज स्ट्रॉसबर्गर (Strasburger, 1875) ने की थी। वाल्डेयर (Waldeyer, 1888) ने केन्द्रक में पायी जाने वाली तन्तु रूपी रचनाओं को गुणसूत्र नाम दिया था। ये सामान्यतया 0.5 - 30 μ लम्बी तथा 0.2 - 34 μ व्यास की रचनाय होती हैं। कोशिका विभाजन के समय गुणसूत्र स्पष्ट दिखाई देते हैं। प्रत्येक जाति (species) में गुणसूत्रों की सख्या, आकृति एवं आकार सुनिश्चित होता है। गुणसूत्र जोड़ों (pairs) में पाये जाते हैं।
जाति                   गुणसत्रों की संख्या
मटर                      14 या 7 जोड़े
प्याज                    16 या 8 जोड़े
गेहूँ                       22 या 11 जोड़े
आलू                    42 या 21 जोड़े
मेढ़क                   24 या 12 जोड़े
मनुष्य                  46 या 23 जोड़े

गुणसूत्र की संरचना

गुणसूत्र में निम्नलिखित भाग पाये जाते हैं --

(i) आवरण (पैलिकल - Pellicle) ---

गुणसूत्र एक झिल्ली सदृश्य, आनुवंशिकी दृष्टि से निष्क्रिय आवरण (pellicle) से घिरा होता है। इससे घिरा गाढ़ा प्रोटीन युक्त तरल मैट्रिक्स (matrix) कहलाता है। मैट्रिक्स में अर्धगुणसूत्र (chromatids) पाये जाते हैं।

(ii) अर्धगुणसूत्र या क्रोमेटिड्स (Chromatids or Chromonemata) ---

प्रत्येक गुणसूत्र में दो अर्धगुणसूत्र (chromatids) होते हैं। ये आपस में सर्पिल अवस्था में लिपटे रहते हैं। अर्धगुणसूत्र या क्रोमेटिड्स पर अनेक उभार पाये जाते हैं। इन्हें क्रोमोमीअर्स (chromo meres) कहते हैं। क्रोमोमीअर्स पर जीन्स (genes) स्थित होते हैं।

(iii) सैन्ट्रोमीयर (Centromere) --- 

गुणसूत्र के दोनों क्रोमोटिड्स या अर्धगुणसूत्र सैन्ट्रोमीयर (centromere). द्वारा आपस में जुड़े होते हैं। यह मेटाफेज अवस्था में विभाजन के समय ट्रैक्टाइल तन्तुओं (tractile fibres) से जुड़ता है। मैटाफेज अवस्था में सैन्ट्रोमीयर विभाजित हो जाता है। सैन्ट्रोमीयर की स्थिति के आधार पर गुणसूत्र विभिन्न प्रकार के होते हैं।

(iv) सैटेलाइट गुणसूत्र (Satellite chromosomes) ---

कुछ गुणसूत्रों में द्वितीयक संकीर्णन (secondary constriction) होता है। इसके फलस्वरूप बने गुणसूत्र का छोटा गोलाकार भाग सैटेलाइट (satellite) कहलाता है। इस प्रकार के गुणसूत्र को सैट गुणसूत्र (SAT - chromosome) कहते हैं।
गुणसूत्रों पर स्थित जीन (genes) आनुवंशिक लक्षणों को पीढ़ी दर पीढ़ी पहुँचाते रहते हैं।

गुणसूत्र का रासायनिक संघटन 

गुणसूत्र न्यूक्लियोप्रोटीन (nucleoprotein) से बना होता है। इसमें हिस्टोन (histone) प्रोटीन लगभग 37.5 %, अन्य प्रोटीन लगभग 10.4 %, राइबोन्यूक्लियक अम्ल (ribonucleic acid) 9.6 % , डिऑक्सीराइबोन्यूक्लियक अम्ल लगभग 36.5 % होता है।

गुणसूत्र के कार्य

गुणसूत्र आनुवंशिक लक्षणों को पीढ़ी दर पीढ़ी पहुँचाते है। इनको वंशागति का भौतिक आधार (physical basis of heredity) कहा जाता है।

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