सूक्ष्मदर्शी किसे कहते हैं - Microscope in hindi

सूक्ष्मदर्शी किसे कहते हैं स्वागत है आपका gyankibook के इस आर्टिकल मे जहा हम जानेंगे की sucham darsi kise kahate hain और सूक्ष्मदर्शी कितने प्रकार के होते है। अगर आपको सूक्ष्मदर्शी के बारे में पुरी जानकारी चाहिए तो आप इस आर्टिकल को अन्त तक पढ़ते रहिए क्योकी इस आर्टिकल मे हमने सूक्ष्मदर्शी के बारे मे पुरी जानकारी दी है जिसे पढ़ने के बाद आपको सूक्ष्मदर्शी के बारे मे अच्छी जानकारी हो जाएगी तो चलिये अब हम विस्तार से जानते है की microscope in hindi

सूक्ष्मदर्शी किसे कहते हैं - Microscope in hindi

सूक्ष्मदर्शी की सहायता से उन जीवधारियों या उनके अंगों का अध्ययन सुगमता से कर सकते हैं जिन्हें हम नग्न आँख से नहीं देख सकते।

सूक्ष्मदर्शी कितने प्रकार के होते है

हम हम बाट करते है की सूक्ष्मदर्शी कितने प्रकार के होते है तो प्रयोगशाला में सामान्यतया दो प्रकार के सूक्ष्मदर्शी प्रयोग में लाये जाते हैं

(1). सरल विच्छेदन सूक्ष्मदर्शी (Simple dissecting microscope) 
(2). संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound microscope) 

सरल विच्छेदन सूक्ष्मदर्शी (Simple Microscope in hindi)

Simple microscope in hindi
सरल विच्छेदन सूक्ष्मदर्शी
प्रयोगशाला में सूक्ष्म पौधों व जीवों के अध्ययन के लिए तथा उनके विच्छेदन व उनसे निर्मित स्लाइडों के अध्ययन के लिए इस प्रकार के सूक्ष्मदर्शी का उपयोग किया जाता है । इसकी सहायता से किसी भी वस्तु को उसकी वास्तविक आकृति से 4 से 40 गुना तक बड़े रूप में देखा जा सकता है । यह सूक्ष्मदर्शी मुख्यतः दो भागों का बना होता है।
1. यान्त्रिकीय भाग (Mechanical portion)
2. प्रकाशकीय भाग (Optical portion)

(1). यान्त्रिकीय भाग (Mechanical portion)

इसमें सबसे नीचे की ओर ' V ' या ' U ' के आकार का आधारीय भाग होता है जिसे आधार कहते हैं । आधार से निकली एक खड़ी भुजा " स्तम्भ " होती है । स्तम्भ पर आधार से कुछ ऊपर एक परावर्ती दर्पण लगा होता है। इसके कुछ ऊपर दूसरी ओर एक समायोजन पेंज लगा होता है।

स्तम्भ ऊपर से खोखली होती है और इस भुजा के ऊपर एक अन्य छोटी भुजा लगी रहती है जिसे पेंच की सहायता से पहली भुजा के अन्दर ऊपर नीचे किया जा सकता है । इस दूसरी भुजा के ऊपर एक मुड़ने वाला भुजा लगी रहती है जिसके अगले सिरे पर नेत्रिका लगी होती है। मुख्य भुजा के ऊपरी सिरे पर काँच का बना एक मंच होता है।

(2). प्रकाशकीय भाग (Optical portion)

मंच के नीचे मुख्य भुजा से लगा हुआ दर्पण प्रकाश को परावर्तित करके यन्त्र तक पहुँचाता है। मंच पर स्लाइड को दबाने के लिए पिछले भाग में दो क्लिप लगे रहते हैं । चल भुजा से जुड़ी मुड़ने वाली भुजा के अगले सिरे पर एक उत्तल लेन्स द्वारा बनी नेत्रिका होती है।

सरल विच्छेदन सूक्ष्मदर्शी के उपयोग की विधि - simple microscope use in hindi

काँच के बने मंच पर क्लिप की सहायता से स्लाइड को लगाते हैं। यदि विच्छेदन करना है तो विच्छेदन वस्तु को मोम जमी पैट्रीडिश में रखकर मंच पर रखते हैं। नेत्र को लेन्स के ठीक ऊपर रखकर मुड़ने वाली भुजा को मोड़कर मंच पर रखी हुई वस्तु को लेन्स के फोकस क्षेत्र में लाते हैं। वस्तु का स्पष्ट प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए पेंच की सहायता से लेन्स को ऊपर-नीचे करके फोकस करते हैं।

संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope in hindi)

compound microscope in hindi
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी प्रयोगशाला का सबसे महत्त्वपूर्ण एवं बहुमूल्य उपकरण होता है। एक आँख से देखने वाले इस प्रकार के संयुक्त सूक्ष्मदर्शी को मोनोकूलर संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (minocular compound microscope) कहते हैं । 

संयुक्त सूक्ष्मदर्शी का निर्माण सर्वप्रथम हॉलैण्ड के वैज्ञानिक जैकेरियस जैनसन (Zacharias Janssen - 1590) ने किया था। इस यन्त्र से वस्तु का 400-600 गुणा आवर्धित प्रतिबिम्ब निर्मित होता है। प्रत्येक विद्यार्थी को इसकी रचना, प्रयोग की विधि एवं उपयोगिता का पूर्ण ज्ञान होना अति आवश्यक है।

सरल ढंग से अध्ययन करने के लिए इसे निम्न दो भागों में विभाजित करते हैं
(1). यान्त्रिकीय भाग (Mechanical portion) 
(2). प्रकाशकीय भाग (Optical portion) 

(1). यान्त्रिकीय भाग (Mechanical portion)

ये आधारिक तथा सहायक भाग होते हैं । इसके अन्तर्गत निम्नलिखित मुख्य भाग होते हैं 

1. आधार (Base) -- संयुक्त सूक्ष्मदर्शी से नीचे घोड़े की नाल सदृश अथवा अंग्रेजी के ' U ' या ' V ' के आकार का लोहे का भारी ढाँचा होता है।

2. स्तम्भ (Pillar) -- आधार का निचना भाग जो धरातल पर रखा जाता है पैर तथा ऊपरी उठा भाग जो सूक्ष्मदर्शी के अन्य सभी भागों को सीधे रखता है , स्तम्भ कहलाता है।

3. भुजा (Arm of limb) -- आधार के स्तम्भ से कुछ बाहर की ओर ' C ' के आकार की घुमावदार मजबूत ' भुजा ' होती है। इसी को पकड़कर उपकरण को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता है।

4.नति सन्धि (Inclination joint) -- यह आधार के स्तम्भ व भुजा का जोड़ है जिस पर एक गोल पेंच भुजा को आगे पीछे झुकाने के लिए होता है।

5. स्टेज व स्टेज क्लिप्स (Stage and stage clips) -- आधार के समानान्तर भुजा के निचले भाग में लगी एक चौकोर लोहे की प्लेट को स्टेज कहते हैं । स्टेज के बीच एक गोल छिद्र प्रकाश के आने के लिए तथा स्टेज के किनारों पर सूक्ष्मदर्शीय स्लाइड को एक स्थान पर कसे रखने के लिए क्लिप होती हैं । 

6. उपमंच संघनित्र (Sub - stage condenser) -- यह स्टेज के नीचे लगा होता है । यह प्रकाश की मात्रा को नियन्त्रित करने के काम आता है । 

7. आइरिस डायफ्राम (Iris diaphragm) --  उपमंच संघनित्र के नीचे लगा रहता है । इसकी सहायता से प्रकाश के आने का छिद्र छोटा या बड़ा करके प्रकाश की तीव्रता को कम या अधिक किया जा सकता है । 

8. नालाकार देह (Body tube) -- भुजा के ऊपरी भाग से लगी लगभग 16 सेमी की एक सीधी बेलनाकार व नालाकार देह होती है जिसे एक बड़े पेंज स्थूल समायोजक पेंच द्वारा तेजी से तथा एक छोटे सूक्ष्म समायोजक पेंच द्वारा धीरे - धीरे ऊपर नीचे खिसकाया जा सकता है । इस विधि को रैक और पिनियन समंजन कहते हैं । नालाकार देह के ऊपरी निकले हुए भाग को ड्रा नली कहते हैं तथा नीचे वाले गोल भाग को परिक्रामी कहते हैं।

(2). प्रकाशकीय भाग (Optical portion)

ये वस्तु पर प्रकाश फोकस करने के लिये होते हैं इनमें निन्म भाग होते है 

1. दर्पण (Reflector) -- उपमन्च संघनित्र के नीचे एक गोल दर्पण , लगा रहता है । दर्पण एक सतह से समतल तथा दूसरी सतह से अवतल होता है । दर्पण के द्वारा प्रकाश परावर्तित होकर स्टेज के छिद्र की ओर पहुँचता है । 

2. नेत्रक या आईपीस (Eyepiece) -- नालाकार देह के ऊपरी सिरे पर स्क्रूज द्वारा सरकने वाली एक ट्यूब पर दोनों सिरों पर लगे लेन्स का निर्मित नेत्रक लगा होता है । अध्ययन करते समय इसके ऊपर बायीं आँख लगाकर तथा दाँयी आँख बन्द करके देखते हैं । लेन्स साफ करने के लिए नेत्रक को ट्यूब सहित बाहर भी निकाला जा सकता है तथा आवश्यकतानुसार आवर्धन क्षमता के अंकित नेत्रक ( 5X , 10X , 15X ) लगाये जा सकते हैं ।

3. नोजपीस (Nose piece) -- बॉडी ट्यूब के निचले सिरे पर थोड़ा दायें व बायें गतिशील एक गोल घूमने वाली नोज पीस लगी होती है । इसमें प्रायः दो या तीन अभिदृश्यक  लैन्स लगे होते हैं । लैन्स विभिन्न आवर्धक क्षमता के होते हैं।

संयुक्त सूक्ष्मदशी का उपयोग (Use of Microscope in hindi) 

सूक्ष्मदर्शी महत्त्वपूर्ण एवं कीमती उपकरण है अतः निम्नलिखित सावधानियाँ ध्यान में रखनी चाहिए 

1. अध्ययन करते समय ही सूक्ष्मदर्शी को बॉक्स में से निकालना चाहिए और कार्य समाप्त होते ही पुनः बॉक्स में रखना चाहिए ।

2. सूक्ष्मदर्शी को उपयोग करने से पहले तथा उपयोग के पश्चात अच्छी तरह सूखे सूती या रेशमी कपड़े से साफ कर लेना चाहिए।

3. सूक्ष्मदर्शी प्रयोगशाला की मेज पर किनारे से कम से कम 3-4 इंच हटाकर अन्दर की ओर रखना चाहिए । 

4. सूक्ष्मदर्शी को कभी भी एक हाथ से नहीं उठाना चाहिए , बल्कि दाहिने हाथ से इसकी भुजा तथा बायें हाथ के आधार को पकड़कर उठाना चाहिए । 

5. सूक्ष्मदर्शी के स्टेज पर कभी भी गीली स्लाइड नहीं रखनी चाहिए।

6. आरोपित स्लाइड को कवर स्लिप से ढक कर तथा स्टेज क्लिप्स से कसकर अध्ययन करना चाहिए । 

7. स्लाइड को स्टेज के ऊपर इस प्रकार रखना चाहिए ताकि वस्तु छिद्र के ठीक मध्य में तथा न्यूनवर्धी अभिदृश्यक के ठीक नीचे हो । 

8. उच्चावर्धक अभिदृश्यक का उपयोग विशेष परिस्थितियों में ही करना चाहिए । 

9. सूक्ष्मदर्शी का उपयोग सीधी स्थिति  में ही करना चाहिए।

10. सूक्ष्मदर्शी से अनावश्यक छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए।

11. अध्ययन करते समय सूक्ष्मदर्शी को प्रकाश की ओर रखना चाहिए और अत्यधिक तेज या बहुत कम प्रकाश में अध्ययन नहीं करना चाहिए , इससे आँखों को हानि होती है।

12. प्रायः दिन के प्रकाश को समतल दर्पण तथा बिजली के प्रकाश को अवतल दर्पण  द्वारा परावर्तित करना चाहिए ताकि सर्वोत्तम प्रकाश स्टेज पर रखी वस्तु के ऊपर छिद्र से होकर पड़ सके 

13. तेज प्रकाश में डायफ्रॉम को घुमाकर छिद्र को छोटा तथा कम प्रकाश में छिद्र बड़ा कर लेना चाहिए । 

14. सूक्ष्मदर्शी को सदैव समतल सतह पर ही रखना चाहिए । 

15. सूक्ष्मदर्शी से वस्तु को सही आवर्धन में ही देखना चाहिए। नेत्रक या आइपीस तथा अभिदृश्यक या ऑब्जेक्टिव की आवर्धन क्षमता को गुणा करके सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता सरलतापूर्वक ज्ञात की जा सकती है।

इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (Electron microscope in hindi)

Electron microscope in hindi
इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी
इसका निर्माण नॉल एवं रस्का ( Knoll & Ruska , 1932 ) ने किया। इसकी सहायता से अति सूक्ष्म वस्तुओं विशेषकर कोशिका के कोशिकांगों का अध्ययन किया जाता है । इससे किसी वस्तु को दो लाख गुना बढ़ा करके देखा जा सकता है । इसमें प्रकाश किरणों के स्थान पर इलेक्ट्रॉन किरणों तथा लेन्सों के स्थान पर चुम्बकीय क्षेत्र का प्रयोग किया जाता है । इलेक्ट्रॉन किरणें चुम्बकीय क्षेत्र से होती हुई जब किसी वस्तु में से निकलती हैं तो वस्तु के सूक्ष्म कण इन्हें परावर्तित कर देते हैं । ये परावर्तित किरणों एक चुम्बकीय क्षेत्र में होकर एक प्रतिदीप्तिशील पर्दे पर वस्तु के चित्र को प्रतिबिम्बित कर देती हैं। इस अवस्था में चित्र को देखा जा सकता है और उसका फोटो भी तैयार किया जा सकता है ।


आज के आर्टिकल मे हमने जाना sucham darsi kise kahate hain और microscope in hindi के बारे में हमने देखा की microscope कितने प्रकार के होते है और microscope का उपयोग कैसे करते है। अगर आपको सूक्ष्मदर्शी के बारे मे जानकारी चाहिए तो इस आर्टिकल से आपको सूक्ष्मदर्शी के बारे मे सम्पूर्ण जानकारी हो जाएगी।

हमे उमीद है आपको इस आर्टिकल से sucham darsi kise kahate hain और सूक्ष्मदर्शी कितने प्रकार के होते है को समझने मे मदद मिली होगी अगर आपके मन मे कोई भी सवाल हो तो आप हमे कमेंट करके पुछ सकते है और ये आर्टिकल आपको कैसा लगा यह भी हमे कमेंट करके जरुर बताए और इसे अपने मित्रो के साथ शेयर भी करे।




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