रसखान का जीवन परिचय | Raskhan Ka Jivan Parichay

रसखान का जीवन परिचय

इस लेख में, हम विस्तार से रसखान के जीवन परिचय को समझेंगे। इनका जीवन परिचय कक्षा 10 तथा 12 के छात्रों के लिये बेहद ही महत्वपूर्ण होता है। क्योकी बोर्ड की परीक्षा में हिन्दी के प्रश्न पत्र में रसखान की जीवनी लिखने के प्रश्न पुछे जाते है। ऐसे में अगर आप उन छात्रों में से है जो, इस समय बोर्ड के परीक्षा की तैयारी कर रहा है। तो इस जीवनी को आप पुरा ध्यानपूर्वक से अवश्य पढ़े ताकी, आपको परीक्षा में इनकी जीवनी को लिखने में परेसानी ना हो।

साथ ही यह जीवनी न केवल बोर्ड के परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिये ही सहायक है, बल्की जो छात्र इस समय किसी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी में लगे हुए है उनके लिये भी रसखान की जीवन को समझना काफी उपयोगी साबित हो सकता हैं। क्योकी बहुत से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में रसखान के जीवन से सम्बंधित प्रश्न पुछे जाते है। और इस लेख में उन्हीं सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर दिये गए है।

इस लेख में हम रसखान के जीवन से जुड़े उन सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों को समझेंगे, जो आपके बोर्ड परीक्षा या प्रतियोगी परीक्षा में पुछे जा सकते है जैसे की, रसखान जी का जन्म कब और कहां हुआ था, रसखान का वास्तविक नाम क्या था, रसखान किस काल के कवि थे, रसखान का साहित्यिक परिचय, रसखान की प्रमुख रचनाएँ, रसखान के माता पिता का नाम, रसखान के गुरु का नाम क्या था और रसखान की मृत्यु कब हुई थी आदि। यह सभी प्रश्न बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योकी इस प्रकार के प्रश्न ही परीक्षाओं में पुछे जाते है और इन सभी प्रश्नों के उत्तर आपको इस लेख में एकदम विस्तार से मिल जायेंगे, जिसे पढ़ कर आप अपने परिक्षा की तैयारी कर सकते हैं। तो, अगर आप वास्तव में raskhan ka jeevan parichay को बिल्कुल अच्छे से समझना चाहते है तो इस लिख को पुरा अन्त तक अवश्य पढ़े।

रसखान की जीवनी (Raskhan Biography In Hindi)

नाम रसखान
वास्तविक नाम सैय्यद इब्राहिम खान
जन्म तिथि 1548
जन्म स्थान अमरोहा
मृत्यु तिथि 1628
मृत्यु स्थान वृंदावन
राष्ट्रीयता भारतीय
धर्म इस्लाम
शैली भावात्मक
छन्द कवित्त दोहा सवैया
रचनाएँ सुजान सखान, प्रेमवाटिका
पिता का नाम गंनेखां (निश्चित नहीं)
माता का नाम मिश्री देवी (निश्चित नहीं)
गुरु का नाम गोस्वामी बिट्ठलनाथ

रसखान का जीवन परिचय (Raskhan Ka Jivan Parichay)

रसखान का असली नाम सैय्यद इब्राहीम था परन्तु काव्य जगत में वे रसखान के नाम से ही प्रसिद्ध है। रसखान मुसलमान पठान थे और दिल्ली के पठान बादशाहों के वंशज थे। इनका जन्म सन् 1548 ई. में लगभग दिल्ली में हुआ था इनका पालन पोषण राजकीय परम्परा के अनुसार ही हुआ। मुगल पठान संघर्ष के कारण वे दिल्ली छोड़कर चले गये थे।

कहा जाता है कि युवावस्था मे रसखान का चालन-चलन ठीक नहीं था। वे स्वभाव से प्रेमी हृदय व्यक्ति थे। प्रारम्भ में इनका प्रेम लौकिक था किन्तु विठ्ठलानाथ जी के सम्पर्क में आने पर उनक लौकिक प्रेम भगवान कृष्ण के प्रति अलौकिक प्रेम में बदल गया। उन्हें संसार से विरक्ति हो गई। विट्ठलनाथ जी ने उन्हें अपना शिष्य बना लिया। उनके प्रभाव से रसखान कृष्ण के सच्चे भक्त हो गये। वे जितना कृष्ण के रूप सौन्दर्य पर मुग्ध थे उतना ही उनकी लीला भूमि ब्रज के प्राकृतिक सौन्दर्य पर मोहित थे। जीवन के शेष भाग में रसखान कृष्ण-भक्ति से ओत-प्रोत सरस और मार्मिक रचनाएँ करते रहे। 'दो सौ वैष्णवों की वार्ता' नामक ग्रन्थ में रसखान को उच्चकोटि का कृष्ण भक्त कवि कहा गया है। ब्रजभूमि और ब्रजराज के दीवाने रसखान लगभग 79 वर्ष की आयु में सन् 1628 में स्वर्गधाम सिधार गये।

रसखान का साहित्यिक परिचय

रसखान मूलतः फारसी भाषा के विद्वान् और कवि थे। किन्तु ब्रजभूमि में आकर ब्रजभाषा और ब्रज संस्कृति से प्रभावित होकर वे ब्रजभाषा में काव्य रचना करने लगे । मुसलमान होते हुए भी वे कृष्ण के इतने परम भक्त हो गये थे कि बहुत से हिन्दू भी नहीं हो सकते। उनके हृदय में भगवान कृष्ण और उनकी जन्म-भूमि ब्रजभूमि के प्रति अपार प्रेम था जिसे उन्होंने अपने काव्य में अभिव्यक्त किया है। इसी को लक्ष्य करके भारतेन्दु बाबू हरिश्चन्द्र ने मुसलमान भक्त कवियों के सम्बन्ध में सटीक कहा है -

"इन मुसलमान हरिजनन पै कोटिन हिन्दू बारिए।"

रसखान मूलत: एक रसिक कवि थे। उनकी सांसारिक रसिकता कृष्ण भक्ति में परिणित हो गयी और वे एक श्रेष्ठ कवि बन गये। इसलिए भक्ति और रस की दृष्टि से रसखान का काव्य वास्तव में रस की खान है। वस्तुतः रसखान का स्थान हिन्दी काव्य जगत की सगुण भक्ति धारा में बहुत ऊँचा है। वे अष्टछाप के महाकवियों की भाँति ब्रजभाषा साहित्य में सदा अमर रहेंगे।

रसखान की काव्य रचनाएँ

रसखान की दो प्रसिद्ध काव्य रचनाएँ हैं - सुजान-रसखान और प्रेम-वाटिका। सुजान-रसखान की रचना कविता और सवैया छन्द में हुई है। इसमें 139 छन्द हैं। यह भक्ति और प्रेम-विषय सरस काव्य है। प्रेम-वाटिका की रचना दोहा छन्द में हुई है। इसमें 25 दोहे तथा कुछ सोरठे हैं। यह विशुद्ध प्रेम काव्य है। कुछ विद्वान् 'रसखान शतक' नाम से तीसरी रचना भी बताते हैं।

रसखान का जीवन परिचय pdf

रसखान की सम्पुर्ण जीवनी को यहा पर pdf के रुप में भी दिया गया है, जिसे आप बहुत ही असानी से डाउनलोड कर सकते हैं। और इस पीडीएफ की सहायता से आप, रसखान की जीवनी का अध्ययन कभी भी अपने समयानुसार कर सकते हैं। रसखान का जीवन परिचय pdf download करने के लिये नीचे दिये गए बटन पर क्लिक करे और पीडीएफ फ़ाईल को डाउनलोड करे।

रसखान जी के जीवन परिचय को वीडियो के माध्यम से समझें


FAQ: रसखान के बारे में प्रश्न उत्तर

प्रश्न -- रसखान कौन थे?

उत्तर -- रसखान जिनका मूल नाम सैयद इब्राहिम खान था एक भारतीय सूफी मुस्लिम कवि थे। 

प्रश्न -- रसखान का जन्म कब हुआ था?

उत्तर -- रसखान के जन्म को लेकर विद्वानों में काफी मतभेद है। कुछ विद्वान यह मानते है की, रसखान का जन्म सन् 1533 से 1558 के बीच कभी हुआ था। जबकी, कुछ विद्वानों का कहना है की इनका जन्म सन् 1548 ई. में हुआ था।

प्रश्न -- रसखान का जन्म कहाँ हुआ था?

उत्तर -- रसखान जी का जन्म कहाँ हुआ था यह निश्चित रूप से कोई नही जानता, इस बात को भी लेकर विद्वानों में कई  मतभेद है। कुछ मानते है की इनका जन्म दिल्ली में हुआ था जबकी, कुछ और लोगों के मतानुसार इनका जन्म उत्तरप्रदेश के हरदोई जिले में पिहानी नामक ग्राम में हुआ था।

प्रश्न -- रसखान के पिता कौन है?

उत्तर -- रसखान के पिता एक जागीरदार (अमीर जमींदार) थे।

प्रश्न -- रसखान का दूसरा नाम क्या है?

उत्तर -- रसखान जी का दूसरा नाम सैय्यद इब्राहिम था और यही इनका वास्तविक नाम है।

प्रश्न -- रसखान के गुरु का क्या नाम है?

उत्तर -- रसखान के गुरु का नाम गोस्वामी विट्ठलदास था।

प्रश्न -- रसखान किस काल के कवि थे?

उत्तर -- रसखान जी भक्ति काल के कवि थे।

प्रश्न -- रसखान की दो रचनाएं?

उत्तर -- सुजान सखान, प्रेम वाटिका रसखान की दो रचनाएं है।

प्रश्न -- रसखान किस राजवंश में उत्पन्न हुए थे?

उत्तर -- रसखान दिल्ली के पठान बादशाहों के वंशज थे।

प्रश्न -- रसखान के माता-पिता का नाम क्या था?

उत्तर -- रसखान के माता पिता के नाम का उल्लेख आधिकारिक तौर पर कही भी नही किया गया है, लेकिन कुछ लोग यह मानते है की, इनके पिता का नाम गंनेखां और माता का नाम मिश्री देवी है।

प्रश्न -- रसखान की मृत्यु कब हुई थी?

उत्तर -- रसखान की मृत्यु सन् 1628 ई. में हुई थी।

प्रश्न -- रसखान की मृत्यु कहाँ हुई?

उत्तर -- माना जाता है की, रसखान जी की मृत्यु वृंदावन मन हुई थी।

निष्कर्ष

यहा पर इस लेख में हमने, बहुत ही अच्छे तरह से रसखान की जीवनी को समझा। यह जीवनी बहुत ही महत्वपूर्ण है उन छात्रों के लिये जो कक्षा 10 में या 12 में पढ़ रहे है। क्योकी बोर्ड परीक्षा के हिन्दी के विषय में एक प्रश्न ऐसा होता है जिसमे आपको तीन या चार कवियों के नाम दिये होते है जिनमे से आपको किसी एक का सम्पुर्ण जीवन परिचय लिखना होता है। ऐसे में उन कवियों में रसखान का भी नाम सामिल हो सकता हैं, इसलिए बेहतर यही है की आप इनके जीवन परिचय को अच्छे से पढ़ कर तैयार करले। ताकी अगर परीक्षा में इनका जीवन परिचय लिखने को आये तो, आप उसे असानी से लिख सके। इसी के साथ हम आशा करते है की आपको यह जीवनी जरुर पसंद आया होगा और हमे उमीद है की, इस लिख की सहायता से आपको, रसखान का जीवन परिचय कैसे लिखें बिल्कुल अच्छे से समझ में आ गया होगा। यदि आपके मन में इस इस लेख से सम्बंधित कोई सवाल है तो, आप नीचे कमेंट कर सकते हैं। और साथ ही इस raskhan ki jivani को आप अपने सहपाठी एवं मित्र के साथ शेयर भी जरुर करे।

अन्य जीवन परिचय यहां पढ़े :-

0 Response to "रसखान का जीवन परिचय | Raskhan Ka Jivan Parichay"

Post a Comment