पत्र कैसे लिखते है? (Letter writing in hindi)


letter writing in hindi

letter writing in hindi (पत्र कैसे लिखते है हिन्दी मे)

पत्र एक ऐसा माध्यम है जिस द्वारा हम अपने विचार भाव तथा उद्दगारों को उन व्यक्तियों तक पहुंचा सकते हैं , जो हमसे इतनी दूरी पर हैं जहां हम सुगमता से नहीं पहुंच सकते।

पत्र लेखन एक कला है और इसमें प्रवीणता प्राप्त करने के लिए आपको अन्य कलाओं की भांति निरन्तर अभ्यास, लगन और परिश्रम की आवश्यकता पड़ेगी। पत्र लिखते समय हमें उस सामाजिक नियमों को, स्वीकृत लिखने के ढंगों को तथा उपयुक्त शैली को अपनाना पड़ता है जो पत्र को व्यक्तिनुकूल बना सके।

उदाहरण के लिए मित्रों को पत्र लिखते समय हमें उनको विश्वास में लेना पड़ता है, व्यावसायिक पत्रों में अपनत्व की अपेक्षा सभ्यता और शिष्टाचार अधिक महत्त्व रखते हैं, जबकि सरकारी पत्रों में केवल मात्र औपचारिकता और बन्धनों से युक्त शैली ही अपनाई जाती है, पर प्रेम-पत्रों में प्रेरणा और सुख का संगम होता है।

इस प्रकार पत्रों में कई प्रकार की शैली तथा अभिव्यक्ति को अपनाना पड़ता है अर्थात् जैसा पत्र वैसा ढंग अर्थात् पत्र प्यार की गर्माहट भी महसूस करवाते हैं तो व्यापार की उन्नति में सहायक भी बनते हैं, दो धड़कते हृदयों की भावनाओं को प्रदर्शित करते हैं तो दु:ख के सागर को भी इसी के द्वारा रोका जा सकता है। थोड़े शब्दों में पत्र आज के जीवन में एक आवश्यक अंग बन चुके हैं।

पत्र कितने प्रकार के होते है - (types of letters in hindi)

अब हम बात करते है की पत्र के कितने भाग होते है मतलब पत्र कितने प्रकार के होते है। वैसे तो पत्रों को कई श्रेणियों में विभाजित कर सकते हैं पर प्रमुख श्रेणियां तीन ही हैं। मतलब की पत्र मुख्य रुप से तिन प्रकार के होते है।

(1). व्यक्तिगत और समाजिक पत्र
(2). प्रार्थना पत्र 
(3). व्यावसायिक पत्र

एक पत्र को हम प्रायः 6 भागों में बांट सकते है

(1) अपना पता और तारिख 
(2) सम्बोधन 
(3) मूलपाठ 
(4) सौहार्दपूर्ण समाप्ति 
(5) हस्ताक्षर
(6) प्राप्तकर्ता का नाम और पता 

पत्र के अंग-पत्र के विभिन्न भागों का विस्तारपुर्वक वर्णन 

जैसे की हमने आपको ऊपर बताया की पत्र को हम प्रायः 6 प्रमुख उपभागो में विभक्त कर सकते है। तो चलिये अब हम इन्ही 6 उपभागो को विस्तार से पढ़ते है, ताकी जब आप पत्र लिखें तो आपको सम्पूर्ण जानकारी हो की पत्र कैसे लिखे और किस प्रकार इसका अन्त किया जाए।

1) -- लेखक का नाम, पता और लिखने की विधि

पत्र के ऊपर के दायें कोने में लेखक का नाम और तिथी लिखी जाती है। उदहारण के लिये -- 
Dr. Malini Singh M.D.
138 - Lajpat Nagar,
Jalandhar City.
25th May, 2003 

आपने उदहारण में देखा की डॉक्टर शब्द को छोटा करके लिखा गया है तथा तथा मालिनी सिंह के साथ उनकी योग्यता अर्थात् M.D की डिग्री लिखी है वो भी छोटे रुप में। उसके बाद उनके घर का नम्बर, मुहल्ले का नाम और उसके बाद ( , ) लगाया गया है फिर शहर का नाम तथा उसके बाद ( . ) लगाया गया है । और फिर उसके बाद तिथी या तारिख लिखी गई है । तरीख को लिखने के और भी तरीके होते है जैसे --  May 25, 2003.

2) -- सम्बोधन का उल्लेख

पत्र में सम्बोधन का अपना विशेष महत्त्व होता है । जहां खून का रिश्ता हो तथा प्राप्तकर्ता पत्र लिखने वाले से बड़ा हो तो वहां My dear ..... अथवा  Respected ..... 

सम्बोधन अधिक उपयुक्त होगा यहां प्राप्तकर्ता आपका मित्र हो वहां Dear ... अथवा Dearest अथवा My dear .... का प्रयोग करें।

पर जहां पर प्राप्तकर्ता आपका परिचित न हो वहां पर Dear Sir , अथवा Dear Madam या Sir , अथवा Madam , का प्रयोग किया जा सकता है।

लेकिन आपको प्राप्तकर्ता का नाम पता है तथा आप उसे व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते , उस अवस्था में आप Dear Mr. Vikas या Dear Miss Malini या Dear Dr. Shalini लिख सकते हैं।

जहां खून का रिश्ता हो और प्राप्तकर्ता आपसे छोटा हो या आपके बराबर का हो तब भी आप Dear .... या My dear का प्रयोग कर सकते हैं।

3) -- मूल कथा या विषय-वस्तु

पत्र का यह भाग सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसी भाग के लिए ही पत्र लिखा जाता है। इस भाग को जहां सम्बोधन समाप्त हुआ है ठीक उसी के नीचे से प्रारम्भ करना चाहिए। इस भाग में आप अपने विचारों को पैराग्राफ बद्ध करके लिख सकते हैं अर्थात् प्रत्येक महत्त्वपूर्ण विचार को एक पैराग्राफ में लिपिबद्ध करें। 

हां एक बात का विशेष ध्यान रखें कि किसी बात को चाहे वह कितनी ही आवश्यक क्यों न हो , बार-बार न लिखें। ऐसा करने से उस बात का महत्त्व कम हो जाएगा। हां यदि आपने उस बात पर अधिक जोर डालना है तो उसे रेखांकित कर दें।

4) -- सौहार्दपूर्ण समाप्ति

पत्र समाप्त करने से पहले एक Cordial note अवश्य लगाएं जैसे -- With best regards , with best wishes , With kind regards , All the best , With love and regards. याद रखें पत्र की समाप्ति बड़े ध्यान से की जानी चाहिए , क्योंकि पत्र की समाप्ति को Complimentary Close या The Final Salutation का नाम भी दिया जाता है।

वास्तव में यह एक प्रकार का विदाई का नमस्कार भी होता है तथा आपके अन्तिम शब्द ही आपका उसके प्रति प्रेम , समीपता तथा गर्माहट प्रदर्शित करते हैं। आपकी जानकारी और सुविधा के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण अन्तिम सम्बोधन दिए जा रहे हैं।

(i) महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों को लिखते समय : 
(a) Respectfully  
(b) Yours respectfully 
(c) Respectfully yours 
(d) Yours very respectfully
(e) Very respectfully yours, etc. 

(ii) उच्च अधिकारियों को लिखते समय : 
(a) Obediently
(b) Yours obediently 
(c) Yours very obediently
(d) Very obediently yours 

(iii) घनिष्टता को प्रदर्शित करने के लिए : 
(a) Yours sincerely
(b) Sincerely
(c) Sincerely yours
(d) Yours very sincerely
(e) Very sin cerely yours

(iv) साधारण अवसरों पर : 
(a) Truly
(b) Yours truly
(c) Truly yours
(d) Yours very truly
(e) Very truly yours

(v) जहां खून का रिश्ता हो 
(a) Affectionately
(d) Yours affectionately
(c) Affectionately yours
(d) Very affectionately yours
(e) Yours affectionate mother, father, sister 
(f) Lovingly
(g) Yours Lovingly
(h) Lovingly yours
(i) Your loving son/daughter etc.

5) -- हस्ताक्षर

प्रत्येक पत्र के अन्तिम सम्बोधन के पश्चात् पत्र लेखक को अपने हस्ताक्षर करने चाहिएं। हस्ताक्षर साफ और पढ़ने योग्य होने चाहिएं। इस बात का ध्यान रखें कि यदि पत्र लेखक कोई पदाधिकारी हो तो अपने हस्ताक्षर से पहले अपने पद का उल्लेख भी कर सकता है जैसे Capt . Mohan Dharia , Dr. Shaloo अथवा Mrs. Janak Kunwar आदि । हां स्त्रियां स्वयं अपने नाम के पूर्व Miss या Mrs. को कदापि प्रयोग न करें।

6) -- प्राप्तकर्ता का नाम और पता

पत्र के बायें कोने पर (नीचे की ओर) प्राप्तकर्ता का नाम तथा पूरा पता होना चाहिए। पता साफ और स्पष्ट शब्दों में लिखा जाना चाहिए और यही पत्र के लिफाफे पर भी होना चाहिए। हां लिफाफे पर Pin Code ज़रूर लिखें, इससे डाकिए को आसानी होती है।

Patra likhane ka tarika (पत्र लिखते समय इन्ह बातों का ध्यान रखे)

》 पत्र में पत्र लिखने वाले तथा पाने वाले , दोनों के नाम तथा पते का उल्लेख होना चाहिए । साथ ही दिनांक भी लिखनी आवश्यक है।

पत्र लिखते समय अपनी आयु के साथ - साथ पत्र प्राप्त करने वाले व्यक्ति की आयु का भी ध्यान रखना चाहिए । साथ ही उसकी योग्यता आदि का भी ध्यान रखा जाना आवश्यक है।

पत्र का विषय स्पष्ट होना चाहिए।

पत्र में अनावश्यक बातों को सम्मिलित नहीं किया जाना चाहिए । इससे पत्र अपनी महत्ता खो देता है । साथ ही आवश्यक बातों को संक्षेप में अथवा विस्तार से विषय के अनुरूप लिखना चाहिए। 

पत्र की भाषा का विशेष रूप से ध्यान रखा जाना चाहिए । जहाँ तक सम्भव हो सके , पत्र की भाषा सरल तथा गम्भीरता का भाव लिए हुए होनी चाहिए।

पत्र लेखन में लेखन सुन्दर एवं स्वच्छ होना चाहिए । साथ ही भाषा में शुद्धता होनी चाहिए। 

पत्र को इस प्रकार समाप्त किया जाना चाहिए कि पत्र का सन्देश स्पष्ट हो सके।

शुभकामना के लिए पत्र कैसे लिखे 

परिचय --- शुभकामना का अर्थ है अच्छी भावना अर्थात् आप पत्र प्राप्तकर्ता को अपने पत्र द्वारा यह बताना चाहते हैं कि आप उसके प्रति अच्छी भावना रखते हैं । ऐसी भावनाएं विशेष अवसरों पर ही भेजी जाती हैं । आपको पत्र लिखना आ जाए और आप सुगमता और सफलतापूर्वक पत्र लिख सकें , ऐसा हमारा प्रयास है। इसलिए हम प्रत्येक नमूने के पत्र के साथ उसका अनुवाद दे रहे हैं , ताकि प्रत्येक शब्द , वाक्य और पैराग्राफ आपको अच्छी तरह से समझ आ जाए । तो आइए सर्वप्रथम नये वर्ष की शुभकामना का पत्र लें।

नये वर्ष के लिए शुभकामनाएं पत्र

284 J.P. Nagar,
Jalandhar City,
January 1 2021

प्रिय मुन्ना,
इस हर्षमयी नूतन वर्ष का आगमन बारम्बार हो । यह मेरी उत्कृष्ट भावना है कि नूतन वर्ष आपको अनगणित खुशियां और असीमित हर्ष प्रदान करे । इस शुभ कामना के कुछ शब्द मैंने पुराने वर्ष की सम्पत्ति से ही अपने हृदय की गहराईयों में छिपा रखे थे और अब वे मेरे प्यार की खुश्बू के साथ आप तक पहुंच रहे हैं।
सदा तुम्हारी
शालिनी

जन्म दिवस पर पत्र 

18-Link Road,
Kanpur,
9th April, 2003.

प्रिय सुरुची, 
आपको जन्मदिन मुबारक हो और भगवान करे ये दिन बार - बार आये । मैं अपनी शुभ और प्रज्वलित भावनाएँ भेज रहा हूँ । और यह है आपके लिए एक चौंका देने वाली चीज़ । पार्सल को सावधानी से खोलो। हाँ देखा आपने । यह है सोने की कलाई - घड़ी आपके लिए।यह मेरे प्यार का प्रतीक है । यह आपको स्कूल के लिए देर होने से रोकेगी । आपको बहुत - सा प्यार । भगवान करे आप जीवन में उन्नत हों।
आपका स्नेही 
अंकित

धन्यवाद के लिए पत्र कैसे लिखे 

परिचय --- धन्यवाद का पत्र लेखक की कृतज्ञता का द्योतक माना जाता है । उपहार , भेंट या किसी भी प्रकार की सहायता के लिए यदि धन्यवाद का पत्र लिख दिया जाए तो यह लेखक के सुसंस्कृत , उदार और विचारवान व्यक्तित्व का परिचय माना जाता । स्मरण रखिए कि धन्यवाद का पत्र लेखक और उपकारकर्ता के बीच बन्धन सुदृढ़ करता है।

बालक को उपहार के उपलक्ष्य में धन्यवाद 

63, D, Army Quarters,
Ambala Cantt.
26 August, 2001

प्रिय शालिनी,
मेरे पुत्र मुन्ना के जन्म दिवस पर सोने की हाथघड़ी भेजने के लिए आपका अति धन्यवाद । इसे पाकर उसकी खुशियों का ठिकाना नहीं था । उसने अपने अनेक मित्रों को इसे दिखाया है । वास्तव में वह कई महीने से इस के लिए आग्रह कर रहा था । पर मैं इसे स्थगित करता जा रहा था । वास्तव में आपका उपहार न केवल सुन्दर ही है , पर बहुत उपयोगी भी है । अब वह स्कूल समय पर जा सकेगा । मैं पुनः आपके सुन्दर उपहार के लिए धन्यवादी हूँ ।
प्यार सहित । 
आपका स्नेहमयी , 
अनुपम

संवेदना के लिये पत्र कैसे लिखे 

परिचय --- जो पत्र किसी व्यक्ति की मृत्यु पर उसके निकट सम्बन्धी को लिखा जाये उस पत्र को संवेदना पत्र कहते हैं । ऐसा पत्र दुःख को प्रकट करता है तथा संक्षिप्त होता है । इस पत्र में मृतक के गुणों को चुने हुए शब्दों में ज्यादा लिखा जाये तो ज्यादा अच्छा होता है।

पुत्र की मृत्यु पर संवेदना

16/B-27 , partap Road, Jaipur,
22nd Sept. 2001

प्रिय अनूप ,
आपके पुत्र की अकस्मात् मुत्यु पर हमें बेहद दुःख हुआ । कैसा निर्दयी समय आ गया है ? एक पिता के लिए अपने पुत्र को अपनी गोद में दम तोड़ते देखना कितना कष्ट कार्य होगा । कितनी अचानक जुदाई ? फिर भी हमें ईश्वर की आज्ञा के सम्मुख झुकना पड़ता है । भगवान करे दुःखी परिवार को शान्ति मिले।
तुम्हारा विश्वसनीय ,
सुधीर

Letter writing in hindi - letter kaise likhe --

नये राशन कार्ड के लिये आवेदन पत्र 

सेवा में , 
जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी , 
रेलवे रोड़ , 
जालन्धर शहर । 
विषय . एक नये राशन कार्ड के लिए प्रार्थना । 

श्रीमान् जी , 
विनती है कि मैं लुधियाना के हाई स्कूल में बतौर समाजिक अध्यापक के रूप में काम करता था । अभी -अभी मेरा यहाँ तबादला हो गया । अब मैं 138 दिल बाग नगर जालन्धर में रहता हूँ । मेरे पहले के राशन कार्ड में चार सदस्य हैं , जिसे मैं इस प्रार्थना पत्र के साथ भेज रहा हूँ । मुझे आशा है कि श्रीमान् कार्ड शीघ्र भेजेंगे ताकि मैं इस माह का राशन ले सकू । आपकी इस कृपालता के लिये मैं आभारी हूँगा।

धन्यवाद। 
आपका शुभचिंतक , 
सन्तोष कुमार

आज के लेख मे हमने Letter writing in hindi को पूरे विस्तार मे समझा और जाना की हम हिन्दी मे पत्र कैसे लिख सकते है। इस लेख मे हमने Letter kaise likhe in hindiLetter ke prakar औए letter kaise likhate hain सभी के बारे मे विस्तार से बताया है यदि आपको भी हिन्दी मे पत्र लिखना है तो आप इस लेख के द्वारा दी गई जानकारी से हिन्दी मे पत्र लिखने के तरीके जान सकते है। हमे उमीद है आपको इस लेख से पत्र कैसे लिखते है को समझने मे मदद मिली होगी अगर आपके मन मे कोई सवाल हो तो आप हमे कमेंट के माध्यम से पुछ सकते है और ये लेख आपको कैसा लगा ये भी हमे कमेंट करके जरुर बताए और इस लेख को अपने मित्रो के साथ शेयर भी करे। धन्यवाद 


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