ध्वनि प्रदूषण क्या है? Sound Pollution In Hindi

Sound Pollution In Hindi

इस आर्टिकल में हम ध्वनि प्रदूषण क्या है, ध्वनि प्रदूषण किसे कहते हैं sound pollution in hindi को अच्छे से समझने वाले है। जैसा की आपको पता होगा की प्रदूषण कई प्रकार के होते है जैसे वायु प्रदूषण या जल प्रदूषण ठीक इसी प्रकार ध्वनि प्रदूषण भी एक प्रकार का प्रदूषण है। जिसका हमारे दैनिक जीवन पर काफी बुरा असर पड़ता है ध्वनि प्रदूषण एक बहुत बड़ी समस्या है जो प्रतिदिन बड़ती जा रही है। अगर हमे आने वाले कल को बेहतर बनाना है तो ध्वनि प्रदूषण को रोकना हमारे लिये काफी महत्वपुर्ण है।

यहा इस आर्टिकल में हम ध्वनि प्रदूषण से सम्बन्धित कई सारे सवालों को अच्छे से समझेंगे जैसे - ध्वनि प्रदूषण क्या है, ध्वनि प्रदूषण के स्रोत, ध्वनि प्रदूषण का प्रभाव और ध्वनि प्रदूषण रोकने के उपाय। इन सभी सवालों के जवाब आपको यहा विस्तार में मिल जायेंगे इसलिए आप इसे अन्त तक पढ़ते रहिये। हमने प्रदूषण के और भी प्रकार जैसे वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण पर भी विस्तार में आर्टिकल लिखे है यदि आपने इन्हे नही पढ़ा तो, इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आप इन्हें भी जरुर पढ़े। तो चलिये अब हम sound pollution in hindi या noise pollution in hindi को विस्तार में समझते है।


ध्वनि प्रदूषण क्या है (Sound Pollution In Hindi)

ध्वनि या आवाज पैदा करना मानव तथा जीवधारियों का स्वाभाविक गुण है। ध्वनि या आवाज के द्वारा ही हम अपने विचारों का आदान-प्रदान करते हैं किन्तु अनावश्यक, असुविधाजनक तथा अनुपयोगी आवाज को ध्वनि प्रदूषण (Noise pollution) कहा जाता है। सामान्यत: हमारे कान एक निश्चित सीमा तक की आवाज सुन सकते हैं किन्तु जब आवाज सीमा से अधिक तीव्र हो जाती है और जिसे कान सुनने के लिए तैयार न हो तो वह ध्वनि प्रदूषण के अन्तर्गत आती है।

ध्वनि प्रदूषण के स्रोत

ध्वनि या शोरगुल प्रदूषण दो प्रकार से होता है - प्राकृतिक स्रोतों द्वारा तथा मानवीय क्रियाओं से।

(1). प्राकृतिक स्रोतों द्वारा --- बादलों की बिजली की गर्जन से, अधिक तेज वर्षा, आँधी, ओला, वृष्टि आदि से शोरगुल अधिक होता है।

(2). मानवीय क्रियाओं द्वारा --- शहरी क्षेत्रों में स्वचालित वाहनों, रेलगाड़ी, वायुयान, लाउडस्पीकर, रेडियो, मिलों,  दूरदर्शन, बैंड-बाजा, कारखानों, धार्मिक पर्व, विवाह उत्सव, चुनाव अभियान, कूलर, कुकर आदि से शोर होता है। ये मानवीय क्रियाएँ शहरों में अक्सर होती रहती हैं।

ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव (effects of noise pollution in hindi)

ध्वनि तरंगों के रूप में आकर हमारे कान के परदे से टकराती हैं जहाँ से वे सूक्ष्म तंत्रिकाओं से होती हुई श्रवण तंत्रिका तक पहुँचती हैं। अधिक आवाज के कारण ये तंत्रिकाएँ नष्ट हो जाती हैं। एक स्वस्थ मनुष्य 80-85 डेसीबल तक की आवाज सुन सकता है। ध्वनि प्रदूषण का मनुष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है जिसको चार भागों में बाँटा गया है

1). सामान्य प्रभाव ---

तेज आवाज से चिड़चिड़ापन, अनिद्रा, अत्यधिक क्रोध आदि दोष उत्पन्न हो जाते हैं। अधिक शोर के कारण बच्चे अधिक पैदा होते हैं जिनसे जनसंख्या वृद्धि होती है।

2). श्रवण सम्बन्धी प्रभाव ---

इसमें मनुष्य की सुनने की शक्ति प्रभावित होती है। कभी तीव्र ध्वनि से कान के पर्दे फट जाते हैं। नाइट क्लबों में उच्च आवाज में पॉप संगीत अधिक समय तक सुनने के कारण युवा लोगों में श्रवण शक्ति कम हो जाती है। उच्च ध्वनि विद्यार्थियों के अध्ययन में एकाग्रता को कम कर देती है जिससे इसमें स्मृति की कमी, चिड़चिड़ापन व सिरदर्द की समस्या हो जाती है।

3). मनोवैज्ञानिक प्रभाव ---

अधिक तीव्र आवाज के कारण मानव के व्यवहार में परिवर्तन हो जाता है । लोगों में झुंझलाहट, खीझ, तुनकमिजाजी, चिड़चिड़ापन एवं थकान के दोष पैदा हो जाते हैं जिससे उनके कार्य में गलतियाँ अधिक होती हैं।

4). शारीरिक प्रभाव ---

तनाव, चिन्ता, खीझ व उद्वेग के कारण मानव के शरीर में हारमोन्स परिवर्तन होते हैं जिससे मनुष्य उच्च रक्तचाप, उत्तेजना, माँसपेशियों में खिंचाव, पाचनतंत्र में गड़बड़ी, अल्सर जैसे पेट सम्बन्धी रोग से ग्रस्त हो जाते हैं। अधिक शोर से शिशुओं में विकृतियाँ पैदा हो जाती हैं व गर्भपात जैसी दुर्घटना हो जाती है।

ध्वनि प्रदूषण रोकने के उपाय

ध्वनि प्रदूषण क्या होता है, ध्वनि प्रदूषण के स्रोत तथा ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव को अच्छे से समझने के बाद अब हम बात करते है ध्वनि प्रदूषण को हम कैसे रोक सकते है या ध्वनि प्रदूषण रोकने के क्या-क्या उपाय हो सकते है। तो, हमें ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए निम्न उपाय अपनाना चाहिए। 

1). सबसे पहले ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न करने वाले साधनों पर नियंत्रण करना चाहिए।

2). कारखानों में ध्वनि उत्पन्न करने वाले यंत्रों पर साइलेन्सर का उपयोग करना चाहिए।

3). कारखानों में यथास्थान ध्वनिशोधक उपकरण लगाना चाहिए।

4). अधिक आवाज उत्पन्न करने वाले संगीत पर रोक लगाना चाहिए।

5). शहरों में मकान ध्वनिरोधक होना चाहिए।

6). अधिक-से-अधिक पौधे लगाना चाहिए क्योंकि हरे पौधे ध्वनि के प्रभाव को कम कर देते हैं।

7). सड़क के किनारे लगे पेड़-पौधे तेज ध्वनि को कम करने के साथ ही ध्वनि को ऊपर वायुमण्डल में उठा देते हैं।

8). रेल मार्गों और सड़क मार्गों का विकास नगर से थोड़ा दूर करना चाहिए।

9). मनुष्य कान में रुई लगाकर या हेलमेट पहनकर अपने को ध्वनि प्रदूषण से बचा सकते हैं।

इस आर्टिकल में हमने ध्वनि प्रदूषण के कई सारे प्रश्नो को विस्तार में समझा जैसे ध्वनि प्रदूषण क्या होता है, ध्वनि प्रदूषण से क्या प्रभाव पढ़ता है, ध्वनि प्रदूषण का मुख्य कारण क्या है और ध्वनि प्रदूषण को रोकने के उपाय इन सभी को हमने अच्छे से समझा। हमे उमीद है आपको इस आर्टिकल की सहायता से ध्वनि प्रदूषण किसे कहते हैं sound pollution in hindi या noise pollution in hindi को अच्छे से समझने में काफी मदद मिली होगी। अगर आपके मन में ध्वनि प्रदूषण से सम्बंधित या कोई अन्य सवाल हो तो, आप हमे नीचे कमेंट में पुछ सकते है। और इस आर्टिकल को आप अपने दोस्तो के साथ शेयर जरुर करे।

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