ईद पर निबंध | Essay on eid in hindi

ईद-उल फितर पर निबंध (eid ul fitr par nibandh | essay on Eid in hindi)


इसलाम धर्म के लोग हर वर्ष श्रद्धा, भक्ति और भाईचारे के साथ अनेक त्योहार मनाते हैं। इन त्योहारों में सबसे महत्वपूर्ण 'ईद-उल-फितर' है जिसे 'ईद' भी कहते हैं। रमजान का महीना खत्म होने के बाद अगले महीने की पहली तिथि को चाँद दिखायी देने पर 'ईद' मनायी जाती है। इस अवसर पर सर्वत्र चहल पहल और धूमधाम रहती है।

मुहम्मद साहब इसलाम धर्म के पैगम्बर थे। इन्होंने ही इसलाम धर्म की स्थापना की थी। इन्होंने सच्चे मुसलमानों के लिए कुछ कायदे-कानून निर्धारित किये जिनमें नमाज पढ़ना, रोजा रखना (दिन भर भूखा रहना), हज करना आदि प्रमुख हैं। अतः, इनके अनुयायी प्रतिवर्ष रमजान में महीने भर रोजा रखते हैं और सूर्यास्त के बाद खाते-पीते हैं। पूरे महीने विभिन्न मसजिदों में काफी चहल पहल रहती है। इस महीने के बाद नये महीने में 'ईद' मनायी जाती है।

'रमजान' को इसलाम धर्म के लोग सबसे ज्यादा पवित्र महीना मानते हैं। अतः, वे इस पूरे महीने में सूर्योदय से सूर्यास्त तक उपवास रखते हैं जिसे 'रोजा रखना' कहा जाता है। सूर्यास्त के बाद हर रोज सभी इष्ट मित्रों, सगे संबंधियों और अतिथियों के साथ रोजा खोलते हैं जिसे 'इफ्तार' कहा जाता है। इसमें वे विभिन्न प्रकार के पकवान खाते और खिलाते हैं। इस कार्यक्रम में अन्य धर्मों के लोग भी सहर्ष शामिल होते हैं। इस महीने में लोग शुद्ध मन से केवल अच्छा आचरण करते हैं और गरीबों को दान देते हैं।

'रमजान' महीना के अन्तिम दिन 'रोजा' समाप्त हो जाता है और चाँद देखने के बाद अगले दिन 'ईद' त्योहार के रूप में मनायी जाती है। बच्चे बूढ़े, युवा एवं औरतें, सभी नये-नये कपड़े पहनते हैं। लोग 'ईदगाह' में जमा होकर ईद की नमाज अदा करते हैं और एक दूसरे को गले लगाकर 'ईद' की मुबारकबाद देते हैं। सर्वत्र प्रेम और सद्भाव का वातावरण व्याप्त रहता है। 'सेवईं' इस त्योहार का प्रमुख पकवान है जिसे बड़े चाव से लोग खाते-खिलाते हैं। घर आए मेहमानों को 'सेवईं' खिलाने के साथ-साथ 'इत्र' लगाया जाता है और बच्चों को 'ईदी' भी दी जाती है।

इस अवसर पर दोस्तों और संबंधियों के यहाँ आने-जाने का सिलसिला देर रात तक चलता रहता है। एक साथ मिल-जुलकर ईद की खुशियाँ मनाने का मज़ा ही कुछ और है। ईद की खुशियाँ महीने भर की कठोर साधना के बाद मिलती हैं।

यह त्योहार इसलाम के बन्दों के लिए हर्ष का प्रतीक है। इस दिन सभी लोग छुट्टी और खुशी मनाते हैं। यह आपसी एकता, मेल-मिलाप, भाईचारा और सौहार्द बढ़ानेवाला त्योहार है। बच्चों के लिए तो यह मेले-जैसी खुशी और उत्साह लाता है। ऐसे त्योहार बन्धुत्व और सद्भाव में वृद्धि करते हैं और भारतीय संस्कृति को प्रदर्शित करते हैं।

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